Poème n°31
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ज़मीं भी उसकी, ज़मीं की ये नियामतें उसकी ये सब उसी का है, घर भी, ये घर के बंदे भी |
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| ख़ुदा से कहिये, कभी वो भी अपने घर आये! |
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ज़मीं भी उसकी, ज़मीं की ये नियामतें उसकी ये सब उसी का है, घर भी, ये घर के बंदे भी |
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| ख़ुदा से कहिये, कभी वो भी अपने घर आये! |