Poème n°26
|
दूसरी जंगे आलम को तो बंद हुए भी बीते साल अब भी कुछ जापानी अफ़सर छुपे मिले है ड्यूटी पर! |
|
| तुमसे अब कब मिलना होगा? या अब भी नाराज़ हो तुम? |
|
दूसरी जंगे आलम को तो बंद हुए भी बीते साल अब भी कुछ जापानी अफ़सर छुपे मिले है ड्यूटी पर! |
|
| तुमसे अब कब मिलना होगा? या अब भी नाराज़ हो तुम? |