Poème n°22
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सामने आये मेरे, देखा मुझे, बात भी की मुस्कुराए भी, पुरानी किसी पहचान की ख़ातिर |
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| कल का अख़बार था, बस देख लिया, रख भी दिया। |
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सामने आये मेरे, देखा मुझे, बात भी की मुस्कुराए भी, पुरानी किसी पहचान की ख़ातिर |
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| कल का अख़बार था, बस देख लिया, रख भी दिया। |